चौघड़िया क्या है? शुभ और अशुभ चौघड़िया
चौघड़िया उत्तर और पश्चिम भारत – गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश – में शुभ समय देखने की सबसे लोकप्रिय पद्धति है। इसमें सूर्योदय से सूर्यास्त तक के दिन को आठ बराबर भागों में और सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक की रात को आठ भागों में बांटा जाता है।
सात नाम
- अमृत – सबसे उत्तम, हर काम के लिए
- शुभ – मांगलिक कार्य, नई शुरुआत
- लाभ – व्यापार, पढ़ाई, लेन-देन
- चर – यात्रा के लिए अच्छा
- उद्वेग – चिंता; नया काम शुरू न करें
- काल – हानि; टालें
- रोग – रोग; टालें
हर नाम एक ग्रह से जुड़ा है – उद्वेग सूर्य से, चर शुक्र से, लाभ बुध से, अमृत चंद्र से, काल शनि से, शुभ गुरु से और रोग मंगल से। दिन का पहला चौघड़िया उस वार के स्वामी का होता है (सोमवार को अमृत), और आठवां चौघड़िया पहले वाला ही होता है।
क्योंकि हर भाग असली दिन या रात का आठवां हिस्सा है, कोई चौघड़िया ठीक डेढ़ घंटे का नहीं होता। अगर शुभ चौघड़िया राहुकाल से टकराए तो उतना हिस्सा छोड़ देना चाहिए।